जरूरी ख़बर : अब 25 दिन बाद ही होगी नए सिलेंडर की बुकिंग, रुपया ऑल टाइम लो #997 *GO*

संक्षिप्त विवरण
मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने एलपीजी रीफिल बुकिंग के नियमों में नया बदलाव किया है, जिसके तहत अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर की डिलीवरी के 25 दिन बाद ही अगली बुकिंग की सुविधा मिलेगी। वहीं, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण 9 मार्च 2026 को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 92.33 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। हाल ही में, घरेलू सिलेंडर के दाम ₹60 बढ़कर ₹913 हो गए हैं। विशेष सूत्रों ने अनुसार कच्चा तेल 130 डॉलर प्रति बैरेल होने तक भारत सरकार तेल के दाम नहीं बढ़ाएगी।


घरेलू गैस सिलेंडर के नियमों में बदलाव और बढ़ती कीमतें

देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के लिए अब नया 'लॉक-इन पीरियड' लागू कर दिया गया है। सरकारी निर्देशों के अनुसार, उपभोक्ता अब एक सिलेंडर प्राप्त करने के कम से कम 25 दिन बाद ही दूसरा सिलेंडर बुक कर सकेंगे। इससे पहले यह सीमा 21 दिन तय की गई थी। अधिकारियों का दावा है कि यह कदम गैस की जमाखोरी रोकने और सभी को समान आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। कीमतों की बात करें तो 7 मार्च 2026 से घरेलू गैस सिलेंडर ₹60 महंगा हो गया है, जिससे दिल्ली में 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत ₹853 से बढ़कर ₹913 हो गई है। वहीं, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम भी ₹115 बढ़ाकर ₹1883 कर दिए गए हैं।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा भारतीय रुपया

वैश्विक परिस्थितियों का असर भारतीय मुद्रा पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। सोमवार, 9 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 46 पैसे टूटकर 92.33 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, मिडिल-ईस्ट में युद्ध के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर की मांग बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें महज एक सप्ताह में 25% बढ़कर $117 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिसने रुपए पर दबाव बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि साल 2026 में भारतीय रुपया उभरते बाजारों की सबसे कमजोर मुद्राओं में से एक साबित हुआ है।

राज्यों में आपूर्ति की स्थिति और भविष्य के अनुमान

बढ़ते संकट को देखते हुए राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपना पूरा ध्यान केवल घरेलू गैस की डिलीवरी पर केंद्रित करें। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर राहत भरी खबर है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $130 प्रति बैरल के पार नहीं जाता, तब तक घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे जा सकते हैं। वर्तमान में देश के पास विमान ईंधन (ATF) का भी पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया गया है।

आम जनता पर पड़ने वाला संभावित असर

रुपए की इस गिरावट का सीधा असर आम आदमी की जीवनशैली पर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि इससे विदेश में पढ़ाई और पर्यटन महंगा हो जाएगा। इसके अलावा, चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स आयात करता है, इसलिए मोबाइल, लैपटॉप और अन्य विदेशी सामानों की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका है। रिजर्व बैंक (RBI) बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन तेल की ऊंची कीमतों के चलते फिलहाल बड़ी राहत की उम्मीद कम नजर आ रही है।

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