वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल के दाम में 27% की रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी, भारत में एलपीजी के दाम भी बढ़े #997 *Hjk*
सारांश :
7 मार्च 2026 को मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। मात्र एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड 27% महंगा होकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इस संकट के कारण भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। वहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान ने पेट्रोल के दाम 55 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। भारत सरकार पर्याप्त सप्लाई होने की बात कह रही है, किंतु ऐसा कहते हुए भी गैस के दाम बढ़े, जिस कारण लोग पेट्रोल पंप पर भी भीड़ लगा रहे हैं। हालांकि, सरकार और प्रशासन पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रहा है।
घरेलू एलपीजी की कीमतों में बदलाव और सरकारी कदम
कच्चे तेल और गैस की वैश्विक किल्लत की आशंका के बीच, भारत सरकार ने 7 मार्च से रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी लागू कर दी है। घरेलू सिलेंडर (14.2 किग्रा) में 60 रुपये और कमर्शियल सिलेंडर (19 किग्रा) में 115 रुपये का इजाफा किया गया है। अब दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर 1883 रुपये का मिलेगा। आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने 5 मार्च को आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल प्राथमिक रूप से एलपीजी उत्पादन के लिए ही करें। यह आदेश इंडियन ऑयल (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी कंपनियों के लिए जारी किया गया है ताकि उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की रिकॉर्ड तेजी और आपूर्ति संकट
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। 28 फरवरी को संघर्ष की शुरुआत के समय कच्चा तेल 72.87 डॉलर प्रति बैरल था, जो मात्र 8 दिनों के भीतर बढ़कर 92.69 डॉलर के पार चला गया है। यह अप्रैल 2024 के बाद का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है। इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली आपूर्ति में रुकावट है, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। दावों के अनुसार, इस मार्ग के प्रभावित होने से भारत को होने वाली मासिक आपूर्ति का लगभग 50% हिस्सा संकट में पड़ गया है।
होर्मुज रूट पर फंसे जहाज और वैश्विक व्यापार पर असर
होर्मुज जलमार्ग पर स्थिति तनावपूर्ण होने के कारण फारस की खाड़ी में करीब 200 से अधिक मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें भारत के 38 जहाज शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें रूस से आ रहे कच्चे तेल के टैंकर भी हैं। वैकल्पिक मार्गों के रूप में अब जहाजों को 'केप ऑफ गुड होप' (अफ्रीका के नीचे से) भेजा जा रहा है, जिससे माल ढुलाई की लागत में 30-40% की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने की आशंका है।
क्षेत्रीय असर और स्थानीय बाजारों की स्थिति
ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोत्तरी की आशंका के चलते शनिवार को ग्रेटर नोएडा जैसे इलाकों के पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी गई। कई लोग भविष्य की बढ़ोत्तरी से बचने के लिए वाहनों के टैंक फुल करवाते नजर आए। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर रखे हुए है, हालांकि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, वहां पेट्रोल की कीमतों में कथित तौर पर 55 रुपये प्रति लीटर की भारी वृद्धि की गई है, जिससे दाम 335 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। चीन और जापान जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 70-90% तक खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, वहां भी ऊर्जा संकट गहराने की आशंका है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें