उत्तराखंड में हिमालय के नीचे जमा हो रही ऊर्जा से बड़े भूकंप का खतरा, 3 शहरों के 80% घरों पर खतरा #798 *HJW*
जून 2026 में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप के बाद उत्तराखंड में भी बड़े भूकंप का अलर्ट है। वाडिया इंस्टीट्यूट के पूर्व भू-वैज्ञानिक डॉ. अजय पॉल के अनुसार हिमालय में भूगर्भीय ऊर्जा जमा हो रही है। वहीं, सीबीआरआई (CBRI) के सर्वे में नैनीताल, मसूरी और कर्णप्रयाग के 80% भवन भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील पाए गए हैं। देहरादून पर भी गंभीर भूकंप का खतरा सामने आया है।
सीबीआरआई का दावा: नैनीताल, मसूरी और कर्णप्रयाग के 80% घर खतरे की जद में
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) रुड़की द्वारा किए गए एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार, राज्य के प्रमुख शहरों में निर्माण मानकों की भारी अनदेखी हुई है। नैनीताल, मसूरी और कर्णप्रयाग में लगभग 1100 से 1200 भवनों की जांच की गई, जिसमें निर्माण सामग्री, ढलानों की स्थिरता और आरसीसी संरचना का विश्लेषण किया गया। रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक निष्कर्ष यह है कि इन शहरों के करीब 80 प्रतिशत भवन भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील हैं। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पहाड़ों की कटिंग और ढलानों पर भारी निर्माण के कारण यह जोखिम और भी गंभीर हो गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले देहरादून में भी भूकंप की तरंगों का प्रभाव अधिक हो सकता है।
सेंट्रल सिस्मिक गैप: 200 सालों से इकट्ठा हो रहा है भारी भूगर्भीय तनाव
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व भू-वैज्ञानिक डॉ. अजय पॉल के मुताबिक, उत्तराखंड हिमालय के 'सेंट्रल सिस्मिक गैप' क्षेत्र में स्थित है। इस क्षेत्र में पिछले लगभग 200 वर्षों से 8 या उससे अधिक तीव्रता का कोई बड़ा भूकंप दर्ज नहीं किया गया है। भारतीय प्लेट हर साल 4 से 5 सेंटीमीटर की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़कर यूरेशियन प्लेट से टकरा रही है, जिससे धरती के भीतर भारी मात्रा में तनाव और ऊर्जा लगातार जमा हो रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ऊर्जा कब बाहर आएगी इसकी सटीक भविष्यवाणी संभव नहीं है, लेकिन इस दबाव के कारण पूरा हिमालयी क्षेत्र (उत्तराखंड, नेपाल, हिमाचल प्रदेश आदि) उच्च जोखिम में है।
बचाव की रणनीति: 'भूदेव' ऐप से मिलेगी पूर्व चेतावनी और 11 शहरों का होगा अध्ययन
खतरे को देखते हुए राज्य में आपदा प्रबंधन और तकनीकी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। उत्तराखंड सरकार और आईआईटी रुड़की द्वारा 'भूदेव' (BhuDev) मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो शुरुआती पी-वेव को पहचानकर 15 से 30 सेकेंड पहले लोगों तक अलर्ट भेज सकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार देहरादून, मसूरी, हरिद्वार, ऋषिकेश, उत्तरकाशी, गोपेश्वर, चमोली, जोशीमठ, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग और नैनीताल सहित 11 शहरों का माइक्रो-जोनिंग (सूक्ष्म भूकंपीय) अध्ययन करने जा रही है। कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तराखंड का नया भूकंपीय जोनिंग मैप दिखाते हुए डॉ. विनीत कुमार गहलोत जैसे विशेषज्ञों ने भी इस दिशा में निगरानी की बात पुष्ट की है।
8 नई वेधशालाएं और 500 सेंसर का नेटवर्क बढ़ाएगा सुरक्षा चक्र
भूकंप की सटीक निगरानी के लिए रुड़की, देवप्रयाग, कर्णप्रयाग, रामनगर, बागेश्वर, अल्मोड़ा, केदारनाथ और चकराता में 8 नई भूकंप वेधशालाएं स्थापित की जा रही हैं। राज्य में वर्तमान में 169 सेंसर काम कर रहे हैं, जिन्हें बढ़ाकर 500 करने की योजना है। इसके साथ ही लगभग 500 प्रमुख इमारतों में सायरन आधारित चेतावनी प्रणाली भी लगाई जाएगी। उत्तराखंड का इतिहास विनाशकारी भूकंपों (जैसे 1803 का श्रीनगर, 1991 का उत्तरकाशी और 1999 का चमोली भूकंप) का रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इन नई प्रणालियों और भूकंपरोधी मानकों के सख्त पालन से भविष्य में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें