भारत को रूसी तेल पर अब नहीं मिलेगी अमेरिकी छूट, ट्रेजरी सेक्रेटरी ने जनरल लाइसेंस रिन्यू करने से किया इनकार *SDER* #970
अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी जा रही विशेष राहत को समाप्त करने का कड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि भारत समेत अन्य देशों को रूसी तेल आयात के लिए मिला जनरल लाइसेंस अब रिन्यू नहीं होगा। 11 अप्रैल को समाप्त हुई यह छूट उन खेपों के लिए थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थीं।
रूसी और ईरानी तेल पर अमेरिकी पाबंदी का नया रुख
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिका अब रूसी और ईरानी तेल पर देशों को मिल रहे 'जनरल लाइसेंस' को आगे नहीं बढ़ाएगा। बेसेंट के अनुसार, "हम रूसी और ईरानी तेल पर दी गई छूट को रिन्यू नहीं करेंगे।" इससे पहले मंगलवार को ही ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने ईरानी तेल पर मिलने वाली छूट पर रोक लगाई थी, और अब रूस के संदर्भ में भी यही रुख अपनाया गया है।
11 अप्रैल को समाप्त हुई विशेष राहत की समयसीमा
दावा किया गया है कि अमेरिका ने रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए 5 मार्च को भारत को 30 दिन की विशेष छूट दी थी। यह राहत उन तेल टैंकरों और खेपों के लिए थी जो 11 मार्च से पहले समुद्र में निकल चुके थे। स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि उन संसाधनों का उपयोग हो चुका है, इसलिए आगे किसी भी देश को यह राहत नहीं मिलेगी। गौरतलब है कि ट्रम्प प्रशासन ने बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अस्थायी मंजूरी दी थी, जिसकी समयसीमा 11 अप्रैल को पूरी हो चुकी है।
भारतीय रिफाइनर्स की रूस पर बढ़ती निर्भरता
आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90% आयात करता है। इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के डेटा से पता चलता है कि मार्च के महीने में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात औसतन 19 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) तक पहुंच गया था, जो जून 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है। हालांकि, अप्रैल में यह आंकड़ा गिरकर 15.7 लाख बैरल प्रति दिन रहा, जिसका कारण नयारा एनर्जी की रिफाइनरी में मेंटेनेंस के लिए किया गया शटडाउन बताया जा रहा है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की तेल रणनीति
सिंगापुर स्थित कंसल्टेंसी 'वांडा इनसाइट्स' की फाउंडर वंदना हरि के अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए रूसी तेल पर निर्भरता बनाए रख सकता है। चूंकि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज रूट और फारस की खाड़ी से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है, ऐसे में भारतीय रिफाइनर्स रूसी क्रूड को एक विकल्प के रूप में देख रहे हैं। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और अपनी कुल जरूरत का 88% आयात पर निर्भर है, जिससे यह भू-राजनीतिक फैसला भारत की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
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