नई दिल्ली: 4 साल बाद अब बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, पेट्रोलियम मंत्री ने दिए संकेत *SERT* #999
संक्षिप्त विवरण:
नई दिल्ली में 1 मई 2026 को पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि भारत ने पिछले 4 साल 60 दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं। हालांकि, सरकारी सूत्रों और कच्चे तेल की कीमतों में $126 प्रति बैरल तक आए उछाल के कारण अब जल्द ही कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। तेल कंपनियों को हो रहा भारी घाटा और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट इस वृद्धि के मुख्य कारण माने जा रहे हैं। आशंका है कि दाम एक साथ बढ़ाने के बजाय, थोड़े-थोड़े बढ़ाए जाएंगे। वहीं, न्यूज़ एजेंसी ANI ने कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 993 रुपए की बढ़ोत्तरी का दावा आज सुबह ही किया था।
पेट्रोलियम मंत्री का दावा: 4 साल से वैश्विक संकट के बावजूद कीमतें स्थिर
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सूरत में 'वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस' के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता, युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत सरकार ने पिछले 4 साल और 60 दिनों से पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों को बढ़ने नहीं दिया है। मंत्री ने पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां ईंधन के दामों में 39 से 66 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई और राशनिंग जैसी नौबत आ गई, लेकिन भारत ने आर्थिक स्थिरता बनाए रखी और घबराहट में कोई फैसला नहीं लिया।
कच्चे तेल में उबाल और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में इस सप्ताह भारी हलचल देखी गई, जो $126 प्रति बैरल के चार साल के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई थी। वर्तमान में कीमतें $110 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। इस उछाल का मुख्य कारण 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किया गया हमला और तेहरान की जवाबी कार्रवाई है। इसके परिणामस्वरूप दुनिया के 20% तेल व्यापार के लिए जिम्मेदार 'होर्मुज जलडमरूमध्य' मार्ग प्रभावी ढंग से बंद हो गया है। पिछले साल $70 प्रति बैरल रहने वाला कच्चा तेल इस महीने औसतन $114 प्रति बैरल को पार कर चुका है, जिससे आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है।
तेल कंपनियों का भारी घाटा और कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत
सरकारी सूत्रों और पेट्रोलियम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, अप्रैल 2022 से खुदरा कीमतें स्थिर रहने के कारण तेल कंपनियों पर वित्तीय बोझ असहनीय हो गया है। दावा किया जा रहा है कि सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 20 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 100 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि कंपनियों ने कमर्शियल एलपीजी, जेट ईंधन और इंडस्ट्रियल डीजल के दाम पहले ही बढ़ा दिए हैं, लेकिन आम जनता के लिए खुदरा कीमतें अब तक नहीं बदली गई थीं। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल चुनाव के मतदान समाप्त होने के बाद 25 से 28 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की जा सकती है।
वर्तमान स्थिति और दिल्ली में ईंधन के भाव
वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर की दर से बिक रहा है। लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल व्यापार में आए व्यवधान को देखते हुए यह राहत जल्द खत्म हो सकती है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि कंपनियों के बढ़ते घाटे की भरपाई के लिए निकट भविष्य में कीमतों में संशोधन करना अब अनिवार्य होता जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों का बढ़ना अब केवल समय की बात है।
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