आज देशभर के करोड़ों मोबाइल पर एक साथ बजा सायरन, केंद्र सरकार ने 'सचेत' सिस्टम का किया सफल परीक्षण *XALO* #999
संक्षिप्त विवरण
देशभर में शनिवार (2 मई 2026) को सुबह 11:45 बजे करोड़ों मोबाइल फोन पर अचानक सायरन बजने से लोगों में हड़कंप मच गया। लेकिन, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम की टेस्टिंग के लिए यह इमरजेंसी मैसेज भेजा था। 'सचेत' (SACHET) नामक इस स्वदेशी सिस्टम का उद्देश्य आपदा के समय बिना इंटरनेट लोगों तक रियल-टाइम जानकारी पहुंचाना है। भूकंप सुनामी जैसी घटनाओं में एक साथ पूरे क्षेत्र के मोबाइल में सायरन बज सकेगा। हालांकि पैनिक से बचने के लिए सभी मोबाइल में यह ब्रॉडकास्ट नहीं किया गया।
देशभर में एक साथ गूंजा सायरन और पहुंचा इमरजेंसी मैसेज
शनिवार सुबह ठीक 11:45 बजे दिल्ली-NCR समेत देश के सभी राज्यों की राजधानियों में मोबाइल फोन अचानक तेज सायरन के साथ बजने लगे। मोबाइल स्क्रीन पर हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषाओं में एक अलर्ट मैसेज फ्लैश हुआ। सायरन रुकने के बाद सिस्टम ने मैसेज को बोलकर भी सुनाया। हालांकि, शुरुआत में कई लोग इस अचानक हुई गतिविधि से भ्रमित और परेशान हुए, लेकिन मैसेज में स्पष्ट किया गया था कि यह केवल एक परीक्षण (Test) है और इस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है।
एनडीएमए ने जांची इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की तैयारी
यह परीक्षण राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा भविष्य की किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने की तैयारी के तौर पर किया गया। NDMA ने सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम का उपयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि आपदा के समय सूचनाएं कितनी तेजी से पहुंचाई जा सकती हैं। सरकार ने इस संबंध में दो दिन पहले ही सूचना जारी कर लोगों से अपील की थी कि वे टेस्टिंग के दौरान आने वाले मैसेज से घबराएं नहीं। यह मैसेज देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय कर दिया गया है।
क्या है स्वदेशी 'सचेत' सिस्टम और यह कैसे करता है काम?
इमरजेंसी के दौरान लोगों को रियल-टाइम चेतावनी देने के लिए सरकारी संस्था 'सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमेटिक्स' (C-DOT) ने 'SACHET' नामक एक इंटीग्रेटेड अलर्ट सिस्टम विकसित किया है। यह सिस्टम कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मोबाइल के सामान्य SMS की तरह नंबर-टू-नंबर काम करने के बजाय 'सेल ब्रॉडकास्ट' तकनीक पर आधारित है। इसके जरिए एक खास टावर कवरेज क्षेत्र में मौजूद सभी मोबाइल फोन पर एक साथ सूचना भेजी जा सकती है, जिसके लिए इंटरनेट की भी आवश्यकता नहीं होती।
अब तक भेजे जा चुके हैं 134 अरब से ज्यादा अलर्ट
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अलर्ट सिस्टम का उपयोग पहले भी चक्रवात और मौसम में बदलाव जैसी प्राकृतिक आपदाओं की चेतावनी देने के लिए किया जा चुका है। अब तक 19 से अधिक भारतीय भाषाओं में 134 अरब से ज्यादा SMS अलर्ट भेजे जा चुके हैं। सरकार का दावा है कि इस तकनीक के जरिए भूकंप, बाढ़ और चक्रवात जैसी स्थितियों में लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंचने में मदद मिलेगी।
सायरन बजने और मैसेज आने के पीछे की तकनीक: मुख्य तथ्य
यह सिस्टम पूरी तरह से टेलीकॉम विभाग और NDMA की देखरेख में काम कर रहा है। इसके तहत अगर आपका फोन नेटवर्क कवरेज में है और उसमें CBS (सेल ब्रॉडकास्ट सर्विस) फीचर एक्टिव है, तो बिना इंटरनेट के भी आप तक आपातकालीन सूचना पहुंच जाएगी। यह सामान्य मैसेजिंग से कहीं अधिक तेज और प्रभावी है क्योंकि यह पूरे इलाके को एक साथ कवर करता है, जिससे आपात स्थिति में कीमती जान-माल की रक्षा की जा सके।
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