बड़ी ख़बर : पाकिस्तान और चीन से खतरे की आशंका, भारत ने पहली बार मोर्चे पर तैनात किए 12 परमाणु हथियार *HFSE* #999

भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात किए हैं और पिछले दो वर्षों में देश के परमाणु हथियारों का भंडार 180 से बढ़कर 190 हो गया है, जो पाकिस्तान से 20 अधिक है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की इयरबुक 2026 के अनुसार, वैश्विक स्तर पर परमाणु प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। रिपोर्ट में भारत के बढ़ते रक्षा खर्च, हथियार आयात और 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत साइबर ऑपरेशन्स का भी उल्लेख किया गया है। दावा है कि साल 2025 में भारत ने एक भी परमाणु हथियार तैनात नहीं किया था, इसका कारण पाकिस्तान और चीन से बढ़ता हुआ खतरा माना जा रहा है।


पहली बार मोर्चे पर तैनात हुए परमाणु हथियार

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा इयरबुक 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियारों को मोर्चे पर तैनात किया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2025 में भारत ने एक भी परमाणु हथियार तैनात नहीं किया था, लेकिन 2026 में 12 हथियारों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही पिछले दो वर्षों में भारत का परमाणु हथियारों का कुल भंडार भी 180 से बढ़कर 190 तक पहुंच गया है। दूसरी तरफ, पड़ोसी देश पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की संख्या में कोई बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है और वह 170 पर स्थिर बनी हुई है। हालांकि, पाकिस्तान के कितने हथियार तैनात हैं, इस बात की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। गौरतलब है कि रूस और अमेरिका की तरह भारत भी अपने परमाणु हथियारों की सटीक संख्या, क्षमता और नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं करता है, इसलिए SIPRI और अन्य संस्थाएं अनुमान के आधार पर ही यह रिपोर्ट जारी करती हैं।

दुनिया के नौ देशों के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार

SIPRI इयरबुक 2026 के मुताबिक, दुनिया इस समय एक नए परमाणु प्रतियोगिता के दौर में प्रवेश कर रही है। अमेरिका, रूस, चीन, भारत और पाकिस्तान सहित सभी परमाणु संपन्न देश अपने हथियारों और डिलीवरी सिस्टम को तेजी से अपग्रेड करने में जुटे हैं। साल 2026 की शुरुआत तक दुनिया के कुल 9 देशों (अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इजराइल) के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं, जिनमें से 9,745 हथियार पूरी तरह इस्तेमाल के लिए सेना के भंडार गृह में तैयार हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के करीब 86 प्रतिशत परमाणु हथियार अकेले अमेरिका और रूस के पास हैं और दोनों देश बड़े स्तर पर आधुनिकीकरण कार्यक्रम चला रहे हैं। वहीं, चीन का परमाणु भंडार भी बढ़कर 600 से 620 हथियारों तक पहुंच गया है। इसके विपरीत, केवल अमेरिका (1342), रूस (1020) और फ्रांस (80) ने अपने कुछ परमाणु हथियारों को बेड़े से बाहर यानी रिटायर किया है, जबकि इजराइल के पास 90 हथियार हैं और उसकी संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

रक्षा खर्च और हथियार आयात में भारत का स्थान

इस वैश्विक रिपोर्ट में भारत से जुड़े तीन बेहद महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया गया है। पहला यह कि भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। साल 2025 में भारत का रक्षा खर्च पिछले साल की तुलना में 8.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। रक्षा खर्च के मामले में भारत से आगे केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी हैं। दूसरा बिंदु यह है कि वर्ष 2021-25 के दौरान भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश रहा है, जिसकी वैश्विक हथियार आयात में हिस्सेदारी 8.2% दर्ज की गई है। इस सूची में यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान की संयुक्त हिस्सेदारी 35% रही है।

चीन और पाकिस्तान मोर्चे पर भारत की रणनीतिक तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का मुख्य फोकस अब लंबी दूरी के ऐसे हथियार बनाने पर है, जिनकी पहुंच चीन के आखिरी छोर तक हो सके। वर्ष 2020 में हुई हिंसक गलवान झड़प के बाद से भारत-चीन सीमा पर भारतीय सैन्य निगरानी को काफी बढ़ा दिया गया है। भारत एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर संतुलित रणनीतिक क्षमता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए भारत नए परमाणु डिलीवरी सिस्टम पर भी काम कर रहा है, जिसमें सबसे अहम 'MIRV' (मल्टीपल इंडिपेंडेन्टली टारगेटेबल रीएंट्री व्हीकल) तकनीक है। इस तकनीक के जरिए एक ही बैलिस्टिक मिसाइल से कई परमाणु हथियार अलग-अलग लक्ष्यों पर दागे जा सकते हैं। भारत की अग्नि सीरीज और K सीरीज की मिसाइलें इस तरह के परमाणु हथियार ले जाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

समुद्री परमाणु क्षमता और 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी'

SIPRI की रिपोर्ट में भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत की परमाणु पनडुब्बियां, विशेष रूप से INS अरिहंत, अब देश की ‘सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी’ (दुश्मन के पहले हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता) का मुख्य आधार बन रही हैं। INS अरिघात जैसी पनडुब्बियां पानी के अंदर से ही परमाणु हथियार लॉन्च करने की ताकत रखती हैं। संस्थान का अनुमान है कि भारत अब शांति काल में भी सीमित संख्या में परमाणु हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों पर तैनात करने लगा है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित हमले का तुरंत मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके।

मई 2025 का सैन्य टकराव और 'ऑपरेशन सिंदूर' का खुलासा

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि दुनिया के कई हिस्सों में अब भी बड़े युद्ध छिड़ने की आशंका बनी हुई है। इसी क्रम में कथित तौर पर मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ दिनों के लिए सैन्य टकराव की स्थिति पैदा हुई थी। इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के कुछ ऐसे हवाई और मिसाइल ठिकानों पर हमले किए थे, जिनके पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम से जुड़े होने की आशंका थी। हालांकि, समय रहते दोनों देशों ने इस स्थिति को और गंभीर होने से रोक लिया था। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने पहली बार खुले तौर पर साइबर अटैक और डिजिटल ऑपरेशन्स का इस्तेमाल किया। भारत द्वारा चलाए गए इस डिजिटल अभियान को 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया था, जो 7 से 10 मई 2025 तक चला था। इस बीच, वैश्विक स्तर पर संघर्ष प्रभावित देशों की संख्या में मामूली कमी आई है; जहां 2024 में 50 देशों में संघर्ष चल रहे थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 49 रह गई है। रणनीतिक मोर्चे पर चीन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और वह 12,000 से 15,000 किलोमीटर की रेंज वाली DF-1 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल विकसित कर रहा है।

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