उत्तराखंड-खबरें : उत्तरकाशी में लापता ट्रेकर की तलाश में 6 एजेंसियां जुटीं; हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' की जगह बिकेगा 'वेज पुलाव'; सीएम धामी ने UKSSSC के 221 युवाओं को बांटे नियुक्ति पत्र *KJHG* #657

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रैक से 11 दिनों से लापता नैनीताल की ट्रेकर बबीता पांडे की तलाश में 6 एजेंसियों के 150 से अधिक जवान जुटे हैं, अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। परिजनों ने कथित तौर पर अपहरण की आशंका जताकर सीबीआई जांच की मांग की है। दूसरी ओर, हरिद्वार में संत समाज और मुस्लिम समुदाय के संयुक्त अभियान के बाद 'वेज बिरयानी' के पोस्टर हटाकर 'वेज पुलाव' के स्टिकर लगाए गए हैं, और चेतावनी दी गई है। वहीं, देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के माध्यम से चयनित 221 अभ्यर्थियों को विभिन्न विभागों के लिए नियुक्ति पत्र वितरित किए।


1. उत्तरकाशी में लापता ट्रेकर बबीता पांडे की खोज तेज: 11वें दिन भी सुराग नहीं, परिजनों ने जताई अपहरण की आशंका

महासर्च अभियान में जुटीं 6 एजेंसियां

उत्तरकाशी के दयारा बुग्याल ट्रैक से लापता नैनीताल जिले के रामनगर क्षेत्र स्थित चिल्किया गांव की रहने वाली ट्रेकर बबीता पांडे (24) का 11 दिन बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। एमबीए की छात्रा बबीता को खोजने के लिए उत्तरकाशी पुलिस के दो क्षेत्राधिकारियों (सीओ) के नेतृत्व में एक व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस अभियान में उत्तरकाशी पुलिस, आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, वन विभाग, सेना के जवानों और नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) की टीमों सहित विभिन्न एजेंसियों के 150 से अधिक जवान शामिल हैं। सर्च टीमें घने जंगलों, गहरी खाइयों, गुफाओं, ढलानों और झीलों की तलाश के लिए डॉग स्क्वॉयड, ड्रोन कैमरों और हेलीकॉप्टर की मदद ले रही हैं।

परिजनों को अपहरण का शक, सीबीआई जांच की मांग

लापता बबीता के भाई हर्षित पांडे के अनुसार, लगातार कई दिनों की खोजबीन के बाद भी कोई सामान या कपड़ा न मिलने के कारण परिवार को अब सिर्फ हादसे की आशंका नहीं, बल्कि अपहरण की संभावना भी नजर आ रही है। परिवार ने पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है ताकि 29 मई की रात की सच्चाई सामने आ सके। हर्षित ने बताया कि जिस इलाके से बबीता गायब हुईं, वहां सुरक्षा व्यवस्था सीमित है और निगरानी कैमरे भी नहीं हैं। परिवार का संदेह है कि जांच एजेंसियों को घटना के समय आसपास मौजूद स्थानीय लोगों और अन्य ट्रैकर्स से विस्तार से पूछताछ करनी चाहिए।

गोई बेस कैंप से गायब होने और दोस्तों पर मामले की पूरी कहानी

बबीता पांडे 25 मई को अपने दो दोस्तों के साथ उत्तरकाशी घूमने निकली थीं। हर्षिल और गंगोत्री का भ्रमण करने के बाद, वे 28 मई को उत्तरकाशी के रैथल गांव पहुंचे और एक होमस्टे में रुके। 29 मई को दयारा बुग्याल की ओर ट्रैकिंग शुरू करने के बाद, तीनों ने रात को गोई बेस कैंप के पास टेंट लगाया। बताया गया कि रात के दौरान बबीता टेंट से बाहर निकलीं और वापस नहीं लौटीं। परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने साथ गए दोनों युवकों के खिलाफ अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है और उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस उनकी गतिविधियों, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

फर्जी ट्रैकिंग परमिट का हुआ खुलासा

जांच के दौरान पर्यटन विभाग ने पाया कि जिस ट्रैकिंग परमिट के आधार पर बबीता और उनके साथी दयारा बुग्याल गए थे, उसमें अनियमितताएं थीं। उनके नाम से कोई वैध रजिस्ट्रेशन दर्ज नहीं था। एक ट्रेकिंग एजेंसी ने कथित तौर पर पुराने परमिट में नाम बदलकर नया परमिट तैयार किया था, जिसकी पुष्टि क्यूआर कोड स्कैन करने पर पुराने ट्रेकर्स के नाम सामने आने से हुई। इस खुलासे के बाद संबंधित ट्रैकिंग एजेंसी का पंजीकरण अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।

2. हरिद्वार में 'वेज बिरयानी' पर लगा प्रतिबंध: दुकानों पर अब लगेंगे 'वेज पुलाव' के स्टिकर, संतों की मुहिम को मुस्लिम समाज का समर्थन

संत, ब्राह्मण और मुस्लिम समाज का संयुक्त अभियान

धार्मिक नगरी हरिद्वार और कनखल क्षेत्र में रविवार को 'वेज बिरयानी' के खिलाफ एक अनोखा अभियान देखने को मिला। अखंड परशुराम अखाड़े के नेतृत्व में संत समाज, ब्राह्मण समाज और मुस्लिम समुदाय के लोग एक साथ सड़कों पर उतरे। इस मुहिम के तहत बाजारों, दुकानों, ठेलियों और रेहड़ी-पटरियों से "वेज बिरयानी" के पोस्टर हटाकर उसकी जगह "वेज पुलाव" के स्टिकर लगाए गए। इस अभियान का नेतृत्व श्री हिंदू तख्त के प्रधान यशदीप कौशिक ने किया, जिसमें जूना अखाड़े के साधु-संत और राष्ट्रीय सूफी संत फाउंडेशन से जुड़े मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए।

धर्मनगरी की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण का दावा

मुहिम से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि यह अभियान किसी व्यापारी या व्यवसाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि हरिद्वार की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान और श्रद्धालुओं की भावनाओं के सम्मान के लिए चलाया जा रहा है। यशदीप कौशिक के अनुसार, मंदिरों, प्रमुख चौराहों और धार्मिक स्थलों के आसपास "वेज बिरयानी" नाम से खाद्य सामग्री बेचे जाने पर लोगों की आपत्तियां आ रही थीं। मायापुरी और हर की पौड़ी क्षेत्र में दुकानदारों को "वेज पुलाव" शब्द अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जूना अखाड़े के संत एवं माया देवी मंदिर के पुजारी भास्करपुरी महाराज ने लोगों से "वेज बिरयानी" शब्द का प्रयोग करने वाले खाद्य पदार्थों के बहिष्कार की अपील की और बताया कि ऐसा अभियान ऋषिकेश में भी चलाया गया है।

पुलाव शब्द को बताया परंपरा के करीब, मिला मुस्लिम समर्थन

राष्ट्रीय सूफी संत फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूफी नौशाद अली साबरी ने इस मुहिम का पुरजोर समर्थन किया है। उनके अनुसार, "बिरयानी" और "पुलाव" दोनों फारसी भाषा से जुड़े हैं, लेकिन "पुलाव" का संबंध संस्कृत के "पुलाक" शब्द से भी माना जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता और सामाजिक सौहार्द को देखते हुए "पुलाव" शब्द अधिक उपयुक्त है और यदि किसी शब्द से किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, तो उसका सम्मान किया जाना चाहिए।

3. देहरादून में सीएम धामी ने बांटे नियुक्ति पत्र: UKSSSC से चयनित 221 युवाओं को मिली सरकारी नौकरी, पारदर्शी भर्ती का किया दावा

221 अभ्यर्थियों को विभिन्न विभागों में मिली नियुक्तियां

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को देहरादून के मुख्य सेवक सदन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) के माध्यम से चयनित 221 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इन चयनित युवाओं को राज्य के शहरी विकास, कौशल विकास एवं सेवायोजन, तथा पशुपालन विभाग में विभिन्न पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं। सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से विभागों में रिक्त पद भरने के साथ ही प्रशासनिक कार्यों की गति और दक्षता में सुधार आएगा।

वर्ष 2021 से अब तक 33 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां

मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राज्य सरकार पारदर्शी, निष्पक्ष और तकनीक आधारित भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं का विश्वास मजबूत कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2021 से लेकर अब तक राज्य में 33 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। सीएम धामी ने युवाओं से आह्वान किया कि सरकारी सेवा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि जनसेवा और राज्य निर्माण का महत्वपूर्ण अवसर है, इसलिए वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी से करें।

उद्योगों और स्वरोजगार के जरिए रोजगार बढ़ाने पर जोर

राज्य सरकार के अनुसार, सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए अन्य क्षेत्रों में भी अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए निवेश समझौतों को धरातल पर उतारकर विनिर्माण, फार्मा, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में नए रोजगार सृजित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और होम-स्टे योजना के माध्यम से युवाओं को ऋण, सब्सिडी और प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने तथा नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

टिप्पणियाँ