यूपी-ख़बरें : गूगल मैप की गलती से छूटी चार छात्रों की पुलिस भर्ती परीक्षा; वाराणसी के हॉस्टल में संदिग्ध हालात में नर्सिंग छात्रा की मौत; शंकराचार्य पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाले पलटे *CREW* #965
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के अंतिम दिन गाजियाबाद के चार अभ्यर्थी गूगल मैप की गलत लोकेशन के कारण मुजफ्फरनगर के बजाय शामली पहुंच गए और परीक्षा से वंचित रह गए। वहीं, वाराणसी के सारनाथ स्थित एक बॉयज हॉस्टल की सीढ़ियों पर सिपाही की 19 वर्षीय बेटी व नर्सिंग छात्रा का खून से लथपथ संदिग्ध शव बरामद हुआ है। दूसरी तरफ, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर यौन शोषण का केस दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने फेसबुक वीडियो जारी कर अपने आरोपों से पीछे हटते हुए दावा किया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने दबाव बनाकर उनसे यह फर्जी एफआईआर दर्ज कराई थी।
1. गूगल मैप के गलत दिशा-निर्देश से चार अभ्यर्थियों की पुलिस भर्ती परीक्षा छूटी
परीक्षा केंद्र के बजाय शामली पहुंचे छात्र
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा के अंतिम दिन एक दुर्भाग्यपूर्ण तकनीकी त्रुटि का मामला सामने आया है। गाजियाबाद से दोपहिया वाहनों पर परीक्षा देने निकले चार अभ्यर्थी गूगल मैप की गलती के कारण अपने निर्धारित परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंच सके। अभ्यर्थियों को मुजफ्फरनगर के दीपचन्द ग्रीन इण्टर कॉलेज में परीक्षा देनी थी। इसके लिए उन्होंने नेविगेशन के लिए गूगल मैप का सहारा लिया, लेकिन ऐप पर गलत लोकेशन दर्ज होने के कारण वह कॉलेज को जनपद शामली के चंदेढी गांव में दिखाने लगा। इस गलत दिशा-निर्देश के चलते अभ्यर्थी भ्रमित होकर सीधे शामली पहुंच गए। जब तक छात्रों को इस भूल का अहसास हुआ, तब तक परीक्षा का समय समाप्त हो चुका था और वे परीक्षा से वंचित रह गए।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और क्यूआर कोड का सुझाव
इस घटना की जानकारी मिलने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संजय कुमार वर्मा ने मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि प्राप्त प्रार्थना-पत्रों के आधार पर इस विषय में गूगल और भर्ती बोर्ड से आवश्यक पत्राचार व वार्ता की जाएगी। इसके साथ ही, एसएसपी ने अभ्यर्थियों की मांग पर भविष्य की परीक्षाओं के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि आगामी समय में परीक्षा प्रवेश-पत्रों पर परीक्षा केंद्र की सटीक लोकेशन के लिए क्यूआर कोड अंकित किया जाना चाहिए, जिससे अभ्यर्थी सीधे और सही मार्ग से केंद्र पर पहुंच सकें और ऐसी तकनीकी दिक्कतों से बचा जा सके।
2. वाराणसी: बॉयज हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली नर्सिंग छात्रा की लाश
सीढ़ियों पर खून से लथपथ मिला शव
वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। यहाँ एक पांच मंजिला अपार्टमेंट स्थित बॉयज हॉस्टल की सीढ़ियों पर 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा फलक खातून का शव संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ। छात्रा शिव सर्जिकल नर्सिंग होम नर्सिंग कॉलेज में जेएनएम (जनरल नर्सिंग एंड मिडवाइफरी) द्वितीय वर्ष की छात्रा थी। हॉस्टल में काम करने आए एक इलेक्ट्रीशियन ने सबसे पहले शव को देखा, जिसके प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग हो रही थी और कपड़े खून से भीगे हुए थे। पास ही उसका बैग, एप्रन और कुछ दवाएं पड़ी थीं। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही हैं और वर्तमान में चंदौली के बलुआ थाने में तैनात हैं। उनका परिवार सारनाथ थाना कैंपस स्थित पुलिस कॉलोनी में रहता है।
दो घंटे तक हॉस्टल के कमरे में थी छात्रा
बॉयज हॉस्टल के गार्ड के अनुसार, फलक पिछले दो दिनों से लगातार हॉस्टल के आसपास देखी जा रही थी और मंगलवार को भी वह यहाँ आई थी। बुधवार सुबह करीब 9:20 बजे वह दो लोगों का टिफिन लेकर अकेले सीढ़ियों से ऊपर गई और एक कमरे के अंदर दाखिल हुई। वह करीब दो घंटे तक कमरे के अंदर रही। वापसी के वक्त उसका टिफिन पूरी तरह भरा हुआ था, यानी खाना नहीं खाया गया था। सुबह 11:30 बजे शॉर्ट सर्किट के कारण पावर कट हुआ, जिसके बाद इलेक्ट्रीशियन काम के लिए ऊपर गया और उसे सीढ़ियों पर छात्रा लहूलुहान हालत में मिली।
पुलिस तफ्तीश और पोस्टमार्टम
थाना प्रभारी सारनाथ पंकज कुमार त्रिपाठी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दो डॉक्टरों के पैनल से शव का पोस्टमार्टम कराया गया है और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की गई है। मृतका का मोबाइल फोन मौके से लापता है, जिसकी तलाश के लिए पुलिस कॉल डिटेल (सीडीआर) और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। कॉलेज बंद होने के बावजूद छात्रा बॉयज हॉस्टल में किससे मिलने आई थी, पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
3. शंकराचार्य पर आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी पलटे, कहा- दबाव में कराई फर्जी एफआईआर
रामचंद्र दास पर साजिश का आरोप
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दो बटुकों के यौन शोषण का मामला दर्ज कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज अपने आरोपों से पीछे हट गए हैं। मंगलवार को फेसबुक पर एक वीडियो जारी कर उन्होंने दावा किया कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी रामचंद्र दास ने दबाव बनाकर उनसे यह फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था। आशुतोष का कहना है कि उन्हें गुमराह करके इस मामले में घसीटा गया और इस साजिश में कुछ अधिकारी भी शामिल थे, जिनके खिलाफ उनके पास व्हाट्सएप चैट और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। उन्होंने रामचंद्र दास को 'ढोंगी और फ्रॉडी' बताते हुए आरोप लगाया कि उसने फर्जी वसीयत के जरिए श्री देव बाबा जी आश्रम पर कब्जा किया है, जिसकी शिकायत उन्होंने मथुरा एसएसपी को भेजी है। हालांकि, मथुरा के एसएसपी श्लोक कुमार ने ऐसी किसी भी शिकायत के मिलने या आशुतोष से मुलाकात होने से इनकार किया है।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य की प्रतिक्रिया
इससे पहले सोमवार को जारी एक अन्य वीडियो में आशुतोष ने आरोप लगाया था कि अगर गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य को कोई नुकसान या उनकी हत्या होती है, तो उसके जिम्मेदार रामचंद्र दास होंगे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि आशुतोष उनकी और उनके उत्तराधिकारी की छवि खराब करने की साजिश रच रहा है। उन्होंने कहा, "मुझे आशुतोष का आपराधिक इतिहास जानकर डर लगने लगा है, मैं कांप रहा हूं।" उन्होंने आशुतोष के खुद को शिष्य बताने पर कहा कि संभव है कि देश में कहीं कथा के दौरान उसने दीक्षा ली हो, लेकिन वे उसके स्वभाव से अनभिज्ञ थे। उन्होंने इस मामले की प्रशासनिक जांच कराने की बात कही है।
कानूनी पहलू और पुराना विवाद
सुप्रीम कोर्ट के वकील शाश्वत आनंद के अनुसार, यदि मामला गंभीर आपराधिक प्रकृति का है, तो उसे वापस लेने के लिए अदालत की अनुमति अनिवार्य होती है। इसके लिए दोनों पक्षों को साक्ष्यों के साथ कोर्ट में आवेदन करना होगा। यदि फर्जी एफआईआर के सबूत मिलते हैं, तो अदालत शिकायतकर्ता पर कार्रवाई कर सकती है और पीड़ित पक्ष मानहानि व मुआवजे का दावा कर सकता है।
गौरतलब है कि यह विवाद प्रयागराज माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच हुए विवाद से शुरू हुआ था। इसके बाद 24 जनवरी को आशुतोष ने पुलिस से शिकायत की थी और बाद में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के आदेश पर 21 फरवरी को झूंसी थाने में शंकराचार्य और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में आरोपियों को 25 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
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