उत्तराखंड-ख़बरें : नैनीताल में किसान ने खुद को मारी गोली - मौत; सभी 13 जिलों में मानसून आपदा से निपटने की मेगा मॉक ड्रिल; वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर भाजपा विधायक के बयान से विवाद *SDAF* #698
सारांश
उत्तराखंड के नैनीताल के नाथुवाखान में मानसिक तनाव के चलते 60 वर्षीय किसान मोहन सिंह ने पत्नी को पानी भरने भेजकर कमरे में खुद को अवैध तमंचे से गोली मार ली, जिससे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। वहीं, प्रदेश में मानसून सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री की निगरानी में सभी 13 जिलों के 60 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया। इधर, देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत द्वारा स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली को लेकर दिए गए बयान पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए इसे देश व उत्तराखंड की अस्मिता का अपमान बताया और सार्वजनिक माफी की मांग की है।
1. नैनीताल में मानसिक तनाव के चलते किसान ने खुद को मारी गोली, सुशीला तिवारी अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
पत्नी को बाहर भेजकर आत्मघाती कदम
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत नाथुवाखान (गड़गांव) में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 60 वर्षीय किसान मोहन सिंह ने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। परिजनों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोहन सिंह पिछले काफी समय से गंभीर मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे थे। सुबह करीब 9 बजे उन्होंने एक सोची-समझी रणनीति के तहत अपनी पत्नी को घर के समीप ही पानी भरने के बहाने बाहर भेज दिया। जैसे ही पत्नी बाहर गई, मोहन सिंह ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और पास रखे एक तमंचे से अपनी कनपटी पर गोली मार दी।
अस्पताल पहुंचने पर मौत, पुलिस जांच शुरू
घर के भीतर से आई गोली की तेज आवाज को सुनकर आसपास के ग्रामीण और परिवार के सदस्य तुरंत कमरे की ओर दौड़े। दरवाजा खोलने पर मोहन सिंह लहूलुहान और खून से लथपथ हालत में मिले। उनकी सांसें चलती देख परिजन उन्हें बेहद गंभीर दशा में तुरंत हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक अपने पीछे दो बेटों और पत्नी का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं।
अवैध हथियार को लेकर तफ्तीश
सूचना पाकर मौके पर पहुंची स्थानीय पुलिस की टीम ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए। शव का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम हल्द्वानी के अस्पताल में ही कराया जा रहा है। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हो गया है कि मोहन सिंह ने जिस हथियार से खुदकुशी की, वह एक अवैध तमंचा था। अब पुलिस मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच कर रही है कि एक सीधे-साधे किसान के पास यह अवैध तमंचा कहां से आया और उनके मानसिक तनाव की मुख्य वजह क्या थी।
2. उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में मानसून आपदा से निपटने की मेगा मॉक ड्रिल, मुख्यमंत्री ने कंट्रोल रूम से परखी तैयारियां
राज्य स्तरीय सुरक्षा अभ्यास
उत्तराखंड में मानसून सीजन की शुरुआत के साथ ही संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए गुरुवार को राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। प्रदेश के सभी 13 जिलों में 60 से अधिक संवेदनशील स्थानों पर बाढ़, भूस्खलन, बादल फटना और सड़क अवरुद्ध होने जैसी काल्पनिक परिस्थितियां निर्मित की गईं ताकि राहत एवं बचाव टीमों की कार्यप्रणाली को परखा जा सके। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष पहुंचकर पूरे अभियान की स्वयं मॉनिटरिंग की और आधुनिक उपकरणों की जानकारी ली।
विभिन्न मार्गों और क्षेत्रों में काल्पनिक परिदृश्य
- लंबीधार-किमाड़ी मार्ग: यहां भूस्खलन से एक बस के मलबे में दबने और एक अन्य वाहन के 35 मीटर गहरी खाई में गिरने का काल्पनिक दृश्य बनाया गया, जहां एसडीआरएफ और पुलिस ने 20 लोगों को सुरक्षित निकाला।
- चकराता-त्यूनी मार्ग: एनएच-707ए पर धारनाधार के पास बोल्डर गिरने से सड़क बंद होने और एक वाहन पर बोल्डर गिरने से दो लोगों के घायल होने का दृश्य तैयार कर संयुक्त रेस्क्यू टीम ने मार्ग बहाल करने का अभ्यास किया।
- ऋषिकेश का गौहरी माफी: नदियों का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में बाढ़ का अलर्ट जारी कर नावों के जरिए ग्रामीणों को सुरक्षित निकालने, राहत शिविरों की स्थापना और चिकित्सा सहायता का अभ्यास किया गया।
- हरिद्वार और बागेश्वर: हर की पैड़ी, श्यामपुर कांगड़ी, बिलोना, कपकोट, गरुड़ और कांडा में मकान ढहने व जलभराव की स्थिति पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य और रेडक्रॉस की टीमों ने अभ्यास किया।
- उत्तरकाशी: जिले के दो विकासखंडों के 5 संवेदनशील स्थानों पर सुबह 9:30 बजे सायरन बजाकर इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को सक्रिय किया गया।
जान-माल का नुकसान कम करना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण मानसून में आपदा का खतरा बना रहता है, अतः लोगों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को बिना समय गंवाए आपसी समन्वय से तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर इस बार मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार चारधाम यात्रियों, श्रद्धालुओं और पर्यटकों को समय पर अलर्ट जारी किए जाएंगे।
3. स्वतंत्रता सेनानी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर भाजपा विधायक के बयान से विवाद, कांग्रेस ने माफी और कार्रवाई की मांग की
विधायक दिलीप रावत का विवादित बयान
लैंसडाउन से भाजपा विधायक दिलीप रावत के एक बयान को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। देहरादून में आयोजित स्वरोजगार दिवस कार्यक्रम में संबोधन के दौरान विधायक ने कहा, "बुद्धिमान व्यक्ति कभी क्रांति नहीं करते। इतिहास देख लेना। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली कोई ऐसे बुद्धिमान नहीं थे। क्रांति तब होती है, जब बुद्धि नहीं होती। बुद्धि वाला व्यक्ति ज्यादा एनालिसिस और विचार करता है।" भाषण के दौरान एक व्यक्ति ने बीच में टोकते हुए यह भी कहा कि वह पढ़ा-लिखा नहीं था। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद विधायक ने सफाई दी कि उनके बयान का केवल आधा हिस्सा संदर्भ से काटकर वायरल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि वे क्रांति और बुद्धिमत्ता के हानि-लाभ के विश्लेषण के संदर्भ में बात कर रहे थे।
कांग्रेस का तीखा हमला और सरकार पर निशाना
कांग्रेस ने इस बयान को लेकर भाजपा को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इसे स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उत्तराखंड के गौरव का अपमान बताया। उन्होंने याद दिलाया कि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने पेशावर कांड के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों के आदेश के बावजूद निहत्थे भारतीयों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था, जिसके लिए उन्होंने कालापानी सहित करीब 14 वर्ष जेल में बिताए। वहीं, कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता प्रतिभा सिंह ने विधायक के पूरे भाषण का हवाला देते हुए कहा कि विधायक ने सार्वजनिक मंच से अपनी ही सरकार के कृषि मंत्री पर निशाना साधा है कि जिसने कभी मिट्टी खोदकर पौधा नहीं लगाया, वह कृषि मंत्री बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और संगठन के भीतर संवाद की कमी है।
पूर्व के बयानों पर भी रहा है विवाद
सोशल मीडिया पर भी विधायक के बयान की तीखी आलोचना हो रही है और लोगों ने भगत सिंह, बिस्मिल और सुभाष चंद्र बोस जैसे वैचारिक क्रांतिकारियों का उदाहरण देते हुए विधायक से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उल्लेखनीय है कि लैंसडाउन विधायक दिलीप रावत पहले भी भराड़ीसैंण (गैरसैंण) विधानसभा भवन में ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड का मुद्दा उठाकर विवादों में घिर चुके हैं, जिस पर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें