अगले 2-3 महीनों पेट्रोल-डीज़ल के दाम नहीं घटेंगे : अभी भी सरकारी तेल कंपनियों को ₹74,781 करोड़ का घाटा *VBCN* #999
सारांश
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में बताया कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम होने को लेकर अगले दो से तीन महीनों में ही फैसला लिया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि ईरान युद्ध के समय महंगे दामों पर खरीदे गए कच्चे तेल के स्टॉक के कारण सरकारी तेल कंपनियों को 30 जून तक 74,781 करोड़ रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वर्तमान में वही स्टॉक किए गए कच्चे तेल प्रयोग किए जा रहें है, सस्ते दामों पर नया स्टॉक प्रयोग में आने के बाद ही दाम घटाना संभव है।
अगले 2-3 महीनों में तय होगी पेट्रोल-डीजल की नई कीमतें
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को दिल्ली में आयोजित एक बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती होगी या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अगले दो-तीन महीनों के भीतर ही लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अभी कुछ भी कहना संभव नहीं है। मंत्री के अनुसार, जब अमेरिका-ईरान जंग के समय वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, तब भारतीय तेल कंपनियों को ऊंचे दामों पर क्रूड ऑयल खरीदना पड़ा था। देश की रिफाइनरियां वर्तमान में उसी महंगे खरीदे गए स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं, जिसके चलते तुरंत राहत देना संभव नहीं है।
महंगे क्रूड ऑयल और अंडर-रिकवरी से तेल कंपनियों को भारी घाटा
पेट्रोलियम मंत्री ने सरकारी कंपनियों को हो रहे नुकसान के संबंध में विस्तृत आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि लागत से कम दाम पर ईंधन और गैस बेचने की वजह से देश की सरकारी तेल कंपनियों को 30 जून तक कुल 74,781 करोड़ रुपए का शुद्ध नुकसान उठाना पड़ा है। अप्रैल-जून तिमाही के दौरान पेट्रोल पर 19,905 करोड़ रुपए की अंडर-रिकवरी दर्ज की गई, जबकि डीजल पर यह आंकड़ा 1.44 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। इसी तिमाही में रसोई गैस (LPG) पर कंपनियों को 24,148 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। मंत्री ने कहा कि यदि पिछली तिमाहियों और पिछले साल के एलपीजी नुकसान को भी शामिल कर लिया जाए, तो तेल कंपनियों का कुल नुकसान (टोटल अंडर रिकवरी) 2.1 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। इन सभी वित्तीय भारों को मिलाकर कंपनियों का अंतिम कुल नुकसान 74,781 करोड़ रुपए रहा है।
क्या होती है अंडर-रिकवरी और कैसे बदल रहे हैं कच्चे तेल के दाम
रिपोर्ट के अनुसार, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं लेकिन घरेलू बाजार में सरकारी तेल कंपनियां आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कीमतें उस अनुपात में नहीं बढ़ातीं, तो लागत से कम कीमत पर तेल बेचने से होने वाले इस अंतर को 'अंडर-रिकवरी' कहा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक, 27 फरवरी को अमेरिका-ईरान जंग शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल थी, जो युद्ध के दौरान बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि, दोनों देशों के बीच हुए हालिया समझौते के बाद अब कच्चे तेल के दाम वापस घटकर 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। पेट्रोलियम मंत्री ने उम्मीद जताई कि अगर कीमतों में गिरावट का यही पैटर्न अगले 2-3 महीने तक जारी रहा, तो आगामी कुछ महीनों में उपभोक्ताओं को तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है।
मई में सरकारी कंपनियों ने बढ़ाए थे दाम, निजी कंपनी ने दी बड़ी राहत
घरेलू बाजार की स्थिति देखें तो देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक हिस्से पर नियंत्रण रखने वाली तीन प्रमुख सरकारी कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL)—ने फिलहाल कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले, मई महीने में इन तीनों कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़े क्रूड के दामों का हवाला देकर किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। दूसरी ओर, देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी 'नायरा एनर्जी' ने कच्चे तेल की कीमतों में आई हालिया कमी के बाद उपभोक्ताओं को राहत दी है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती की है, जिसके बाद भोपाल में नायरा के पेट्रोल की कीमत 119.79 रुपए से घटकर 114.79 रुपए और डीजल 102.57 रुपए से घटकर 99.57 रुपए प्रति लीटर पर आ गया है।
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