योगी कैबिनेट की बैठक में 28 अहम प्रस्तावों को मंजूरी : होमगार्ड्स को कैशलेस इलाज, जलालाबाद का नाम परशुरामपुरी *RTEY* #999

सारांश 

लखनऊ में सोमवार सुबह 10 बजे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में 28 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। उत्तर प्रदेश सरकार के इन फैसलों के तहत राज्य के 1.60 लाख से अधिक होमगार्ड्स और उनके परिजनों को 5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम बदलकर अब 'परशुरामपुरी' कर दिया गया है। कैबिनेट ने वाराणसी में ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर-मुरादाबाद में श्रमिकों के लिए अस्पताल, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की सीधी भर्ती और राज्य में तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना समेत कई बड़े नीतिगत बदलावों को हरी झंडी दिखाई है।


होमगार्ड्स और उनके परिवारों के लिए 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज

यूपी के 1.60 लाख से अधिक होमगार्ड्स को मिलेगा बड़ा स्वास्थ्य लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के होमगार्ड्स और उनके आश्रितों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, होमगार्ड्स और उनके परिवार के सदस्यों को अब 5 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी। प्रदेश में वर्तमान समय में करीब 1.18 लाख होमगार्ड तैनात हैं, जबकि 41 हजार नए होमगार्ड्स की भर्ती प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस प्रकार, सरकार के इस फैसले से कुल 1.60 लाख से अधिक होमगार्ड और उनके परिजन लाभान्वित हो सकेंगे।

शाहजहांपुर के जलालाबाद का नाम अब होगा 'परशुरामपुरी'

केंद्र की एनओसी मिलने के बाद नाम बदलने के प्रस्ताव पर लगी अंतिम मुहर

कैबिनेट की बैठक में शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर 'परशुरामपुरी' करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई है। मामले की जानकारी देते हुए कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में माना जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 25 जून 2025 को इस नाम परिवर्तन का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया था। अब केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त होने के बाद राज्य की कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है।

श्रमिकों के बच्चों के लिए वाराणसी मेडिकल कॉलेज में 50% सीटें आरक्षित

गोरखपुर और मुरादाबाद में श्रमिकों के लिए बनेंगे 100-100 बेड के अस्पताल

कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर के अनुसार, वाराणसी में 13 एकड़ भूमि पर एक ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए निशुल्क भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस मेडिकल कॉलेज की कुल सीटों में से 50% सीटें (यानी 50 में से 25 सीटें) श्रमिकों के बच्चों के लिए आरक्षित रखी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, गोरखपुर और मुरादाबाद में भी श्रमिकों की सुविधा के लिए 100-100 बेड के ईएसआईसी अस्पताल बनाए जाएंगे, जिसके लिए दोनों शहरों में पांच-पांच एकड़ जमीन मुफ्त आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं की सरकारी नौकरियों में होगी सीधी भर्ती

बिना यूपीपीएससी चयन प्रक्रिया के समूह 'क' और 'ख' के पदों पर मिलेगी नियुक्ति

खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ियों की सीधी भर्ती नियमावली-2022 में संशोधन को मंजूरी दी है। मंत्री गिरीश यादव ने बताया कि ओलंपिक, महिला ओलंपिक, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की पारंपरिक चयन प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि उन्हें सीधे सरकारी नौकरी दी जाएगी। यह व्यवस्था समूह 'क' और समूह 'ख' के पदों पर प्रभावी होगी, जिसके अंतर्गत 9 पदों पर क्रीड़ा अधिकारी, 9 पदों पर जिला युवा कल्याण अधिकारी और 23 पदों पर उप क्रीड़ा अधिकारी की सीधी भर्ती की जाएगी। इन पदों पर मुख्य रूप से रजत और कांस्य पदक विजेताओं को नियुक्ति का अवसर प्रदान किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में बनेगा स्टार्टअप मिशन डायरेक्टरेट और नई नीतियां

2 लाख करोड़ से अधिक के निवेश और 50 हजार रोजगार का लक्ष्य

राज्य में औद्योगिक और तकनीकी विकास को गति देने के लिए 'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन डायरेक्टरेट' की स्थापना की जाएगी। इसके संचालन के लिए एक एंपावरमेंट कमेटी का गठन होगा, जिसके प्रमुख राज्य के मुख्य सचिव होंगे। इसके साथ ही सरकार ने 'यूपी स्टार्टअप नीति-2026' और 'डेटा सेंटर पॉलिसी' को भी मंजूरी दे दी है। सरकार ने 1000 करोड़ रुपये का एक स्टार्टअप फंड तैयार किया है, जिसमें 400 करोड़ रुपये डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) का शामिल है। इस पहल से राज्य में 50 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने का दावा किया गया है। साथ ही, बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देकर कुल 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

पशुपालकों के लिए पूरे प्रदेश में लागू होगी मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना

सरकार वहन करेगी 85% प्रीमियम, पशुओं की तय की गई बीमा योग्य कीमत

कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने जानकारी दी कि पशुपालकों के आर्थिक संरक्षण के लिए 'मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना' को राज्य के सभी 75 जिलों में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत पशु की दैवीय आपदा, बीमारी या किसी दुर्घटना में मृत्यु होने पर बीमा का लाभ दिया जाएगा। इसमें लगने वाले कुल प्रीमियम का 85% हिस्सा सरकार (जिसमें केंद्र सरकार 51% और राज्य सरकार 34% शामिल है) वहन करेगी, जबकि शेष 15% राशि पशुपालक को देनी होगी।
योजना के अंतर्गत विभिन्न पशुओं की बीमा योग्य कीमत इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • मुर्रा भैंस: 75,000 रुपये
  • विदेशी, हरियाणवी और साहीवाल/गिर नस्ल की गाय: 50,000 से 65,000 रुपये के बीच
  • घोड़ा: 60,000 रुपये
  • बैल: 40,000 रुपये
  • खच्चर, गधा आदि: 20,000 रुपये
  • भेड़ और बकरी: 6,500 रुपये
    मंत्री ने यह भी साझा किया कि प्रदेश की गोशालाओं में वर्तमान में करीब 1.35 लाख गोवंश मौजूद हैं, जिनके रखरखाव पर प्रतिदिन लगभग 8 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है।

कानपुर में खुलेगा पहला निजी कृषि विश्वविद्यालय, पंचायती राज के लिए बजट पास

तीन नए प्राइवेट यूनिवर्सिटीज और रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय को हरी झंडी

उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने तीन नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मंजूरी दी है। इनमें कानपुर के बिल्हौर में प्रदेश का पहला प्राइवेट एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी 'महर्षि महेश योगी इंटरनेशनल एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय', गाजियाबाद में 'अजय कुमार गर्ग विश्वविद्यालय' और फतेहपुर में 'ठाकुर युगराज सिंह विश्वविद्यालय' स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, रायबरेली में एक उद्यान महाविद्यालय एवं रिसर्च सेंटर की स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि आवंटित करने तथा 50 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी पास किया गया है।
वहीं, त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए कुल 14,988.50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को मंजूरी दी गई है। इस बजट का आवंटन और खर्च निम्नलिखित प्रावधानों के तहत किया जाएगा:

  • कुल राशि का 10% (लगभग 1,498 करोड़ रुपये) प्रशासनिक, परिचालन और रख-रखाव के कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
  • 495.89 करोड़ रुपये की धनराशि पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय और उनकी बैठक के भत्तों के लिए तय की गई है।
  • राज्य वित्त आयोग की कुल राशि का 1.05% (लगभग 157.38 करोड़ रुपये) स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और वित्त आयोग से जुड़े विभिन्न स्तरों (राज्य, मंडल, जनपद और विकास खंड) के कार्मिकों के मानदेय, तकनीकी, प्रशासनिक एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए रखा गया है। यह पूरी व्यवस्था 12 दिसंबर, 2024 के शासनादेश के अनुरूप संचालित होगी और इसका व्यय पंचायती राज निदेशक के निर्देशानुसार किया जाएगा।

कैबिनेट के कुछ अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

बैठक के दौरान उपर्युक्त प्रस्तावों के साथ-साथ कई प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • 'उत्तर प्रदेश अधीनस्थ (सहकारी समितियां एवं पंचायत) लेखा परीक्षा सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली-2026' को स्वीकृति प्रदान की गई।
  • वेतन समिति-2016 की सिफारिशों पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति की विभिन्न अनुशंसाओं को मंजूरी दी गई।
  • गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगमों के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने तथा उनकी क्रेडिट रेटिंग सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को पारित किया गया।

टिप्पणियाँ