राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय का इस्तीफा मंजूर : कृष्ण मोहन बने नए कार्यवाहक महासचिव *SALO* #999

सारांश 

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय के स्थान पर रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव नियुक्त किया गया है। ट्रस्ट की 3 घंटे चली बैठक में 4 सोने-चांदी की वस्तुएं दिखाकर चोरी के दावों को खारिज करने का प्रयास किया गया। वहीं, विपक्ष ने ट्रस्ट को भंग करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।


चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार, कृष्ण मोहन संभालेंगे जिम्मेदारी

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जो करीब 3 घंटे तक चली। इस बैठक में ट्रस्ट ने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। चंपत राय की जगह अब दलित समाज से आने वाले रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया कार्यवाहक महासचिव बनाया गया है। बैठक के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बताया कि चंपत राय का मानना है कि जब तक अपराधी पकड़े नहीं जाते, तब तक उनका पद पर रहना सही नहीं है। उन्होंने इस घटना को कष्टदायी और लज्जाजनक बताया। बैठक में ट्रस्टी के. पाराशरन ने स्पष्ट किया कि त्यागपत्र देते ही उसे स्वीकार करना ट्रस्ट के संविधान में शामिल है, इसलिए इसे मंजूर किया गया। अब आगामी 22 जुलाई को ट्रस्ट की अगली बैठक बुलाई जाएगी।

आरोपियों को सजा दिलाएंगे और प्रबंधन की कमियां दूर करेंगे: कृष्ण मोहन

नवनियुक्त कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने पदभार संभालने के बाद कहा कि चढ़ावा चोरी के आरोपियों को कथित तौर पर कड़ी सजा दिलाई जाएगी। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रबंधन की कमियों का फायदा उठाकर इस घटना को अंजाम दिया गया है, और इन कमियों को जल्द ही दूर किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। उन्होंने कहा कि इस घटना से समाज में जो अविश्वास पैदा हुआ है, उसे दोबारा विश्वास में बदला जाएगा। बैठक के बाद ट्रस्ट ने उन 4 सोने-चांदी की वस्तुओं को भी प्रदर्शित किया, जिनकी चोरी होने का दावा किया जा रहा था।

ट्रस्ट के खातों और श्रद्धालुओं की भेंट का पूरा लेखा-जोखा

समीक्षा बैठक के दौरान ट्रस्ट से जुड़ी 5 बड़ी बातें सामने आईं:

  • ट्रस्ट को दान के माध्यम से कुल 3,264 करोड़ रुपये मिले थे, जिनमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य संबंधित कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं।
  • ट्रस्ट की स्थापना से लेकर 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से कुल 582 करोड़ रुपये की चढ़ावा राशि प्राप्त हुई है। इसमें से 391 करोड़ रुपये ट्रस्ट के संचालन और अन्य खर्चों में व्यय हुए हैं, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है।
  • एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने निष्पक्ष जांच के लिए अपने पदों से इस्तीफा दिया। इसके साथ ही गोपाल नागरकट्टे का नाम विशेष आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का निर्णय लिया गया है।
  • नकद दान के अलावा श्रद्धालुओं द्वारा अब तक 2,926 भेंटें अर्पित की गई हैं, जिनका पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज है। एक चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म द्वारा हर साल इन भेंटों का भौतिक सत्यापन किया जाता है।
  • यदि कोई श्रद्धालु अपने द्वारा दी गई भेंट की जानकारी चाहता है, तो वह अयोध्या आकर ट्रस्ट के अधिकारियों से संपर्क कर सकता है।

विपक्ष हमलावर: गिरफ्तारी और ट्रस्ट को भंग करने की उठी मांग

इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि केवल इस्तीफा स्वीकार होने से वे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में नृपेंद्र मिश्रा, चंपत राय बंसल, अनिल मिश्रा, गोविंद गिरी और गोपाल राव जैसे बड़े नाम शामिल हैं और इनके रहते ही यह चोरी हुई है। उन्होंने मांग की कि इन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए और वर्तमान ट्रस्ट की बॉडी को तत्काल भंग कर देना चाहिए। अजय राय के अनुसार, ट्रस्ट में सम्मानित शंकराचार्यों, धार्मिक नेताओं और अयोध्या के उन स्थानीय लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जो पीढ़ियों से प्रभु की सेवा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि ट्रस्ट के पदाधिकारी ही अंतिम रूप से इस चोरी के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि जानबूझकर मामले को भटकाने और गुनहगारों को बचाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि वहां के रखरखाव, दौलत और चढ़ावे की जिम्मेदारी ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ही थी, इसलिए चंपत राय सीधे तौर पर गुनहगार की श्रेणी में आते हैं।

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